K.G.F Chapter 1 Story | Downlod Movie

   K.G.F: Chapter 1 Story | Movie Downlod 

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MovieName : KGF Chapter 1 (2018) Hindi Dubbed 720p 480p WEBRip [950mb] [500mb]

Genre : Action,   Crime,   Drama,  

IMDB Rating : 8.3/10

Director : Prashanth Neel,  

Staring : Yash,  Srinidhi Shetty,  Ramachandra Raju,  

Description : Rocky, a young man, seeks power and wealth in order to fulfil a promise to his dying mother. His quest takes him to Mumbai, where he gets involved with the notorious gold mafia.

Release Date : 21 December 2018


KGF Chapter 1 Trailer

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केजीएफ चैप्‍टर 1 कहानी
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सोने की खदान... गरुड़ा और रॉकी भाई, चैप्टर-2 देखने से पहले PART 1 MOVIE देखे  या पढ़ें के जीएफ चैप्टर-1 की पूरी कहानी

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विस्तार

सिनेमा जगत में इस वक्त अगर किसी फिल्म की चर्चा है तो वह है केजीएफ चैप्टर 2 और रॉकी भाई यानी यश की। यह फिल्म 14 अप्रैल को रिलीज हो रही है। हर कोई इस फिल्म को देखने के लिए उतावला है। इनमें वे लोग तो हैं ही, जो केजीएफ चैप्टर 1 देख चुके हैं। इनके अलावा जिन्होंने फिल्म का पहला पार्ट नहीं देखा है, वे आजू-बाजू वालों से यह पूछने में व्यस्त हैं कि केजीएफ चैप्टर 1 आखिर कहां देख सकते हैं? यह किस ओटीटी प्लेटफॉर्म पर मिल जाएगा? फिल्म के प्रति दीवानगी का आलम यह है कि एडवांस बुकिंग में केजीएफ चैप्टर 2 के टिकट की कीमत दो हजार रुपये से ज्यादा तक पहुंच गई। वैसे तो केजीएफ चैप्टर 1 अमेजन प्राइम वीडियो पर मौजूद है, लेकिन अगर आप भी उन लोगों में शामिल हैं, जो इसे देख नहीं पाए हैं और चंद लम्हों में पूरी कहानी समझना चाहते हैं तो यह केजीएफ चैप्टर 1 की स्पेशल रिकैप रिपोर्ट खास आपके लिए ही तैयार की गई है। यहां हम आपको महज 10 स्लाइड में फिल्म के पहले पार्ट की पूरी कहानी से रूबरू करा रहे हैं। 

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1. यहां से होती है कहानी की शुरुआत

स्क्रीन पर सबसे पहले राष्ट्रपति भवन के साथ नजर आता है साल 1981 और तत्कालीन प्रधानमंत्री रमिका सेन कैबिनेट की अहम बैठक में दिखाई देती हैं। वह कहती हैं, 'मैंने राक्षसों के बारे में सुना था। पहली बार एक राक्षस को देखा। उसके बारे में कोई लिखना या पढ़ना नहीं चाहिए। उसका कोई नामोनिशान इतिहास के पन्नों में नहीं रहना चाहिए। मैं सेना भेज रही हूं और देश के सबसे बड़े अपराधी के डेथ वॉरंट पर साइन कर रही हूं।' दूसरा सीन साल 2018 का है, जिसमें बेंगलुरु स्थित टीवी चैनल के दफ्तर की चीफ एडिटर दीपा हेगड़े किसी किताब को लेकर नाराज होती हैं। बताया जाता है कि उस किताब पर सरकार ने प्रतिबंध लगा दिया था और सारी कॉपियां जलवा दी थीं। सीनियर जर्नलिस्ट आनंद इंगलगी की लिखी इस किताब की एक कॉपी किसी तरह टीवी चैनल के दफ्तर पहुंचाई जाती है। इसके बाद नाम सामने आता है एल डोराडो यानी  सोने के खो चुके साम्राज्य और शक्तिशिला का... साथ ही, एक ऐसे शख्स का, जिसकी तस्वीर लोगों ने पत्थर पर बनवा दी... और यहां से केजीएफ चैप्टर 1 यानी कोलार गोल्ड माइन्स की शुरुआत होती है। 

2. फिर होती है कोलार गोल्ड माइन्स की खोज

कहानी का पहला पन्ना 1951 का है। उस वक्त केजीएफ शहर से करीब 18 किलोमीटर दूर कुएं की खुदाई के दौरान एक अजीब-सा पत्थर मिलता है। उस पत्थर की जांच के लिए सूर्यवर्धन के साथ सरकारी अधिकारी जाते हैं। जांच के दौरान जैसे ही पता लगता है कि उस पत्थर में सोने के अंश हैं तो सूर्यवर्धन सभी अधिकारियों को जान से मार देता है। दरअसल, उस रात दो बड़ी घटनाएं होती हैं। पहली सूर्यवर्धन को सोने की खदान मिल जाती है और दूसरे एक बच्चे का जन्म होता है। सूर्यवर्धन सोने की खदान को लाइम स्टोन माइनिंग के नाम पर 99 साल के लिए लीज पर ले लेता है और सोने के राज छिपाने के लिए वह दूर-दूर से लोगों को जबरन पकड़कर लाता और माइनिंग कराने लगा। इस बीच उस बच्चे की मां का जिक्र होता है, जो सोने की खदान मिलने वाली रात पैदा हुआ था। उस महिला की शादी 14 साल की उम्र में होती है। उम्र के 15वें साल में वह मां बनती है और 25 साल की उम्र में उसकी मौत हो जाती है। जायदाद के रूप में वह अपने बेटे के पास 'आखिरी शब्द' छोड़कर जाती है। वह कहती है, 'दुनिया में सब कहते हैं कि पैसे के बिना चैन से जी नहीं सकते, लेकिन यह कोई नहीं कहता कि बिना पैसे के चैन से मर भी नहीं सकते। मुझसे एक वादा कर... तू कैसे जिएगा, मुझे नहीं पता, लेकिन जब मौत आए, तब दुनिया का सबसे ताकतवर और अमीर बनकर मरेगा।' इसके बाद वह लड़का अपनी मंजिल की तलाश में बंबई पहुंच जाता है। 

3. बंबई में ऐसे होती है यश की एंट्री

बंबई पहुंचने के बाद रॉकी बूट पॉलिश कराने वालों के साथ जुड़ जाता है। अपने सपनों की शुरुआत करने के लिए वह इंस्पेक्टर के सिर पर बोतल फोड़ता है। पहले तो वह भागता है, लेकिन बाद में कहता है कि पुलिस वाले को पता ही नहीं कि उसे किसने मारा। उसे यह बात पता होनी चाहिए। जब पुलिस रॉकी को पकड़ लेती है तो डॉन अपनी पावर दिखाकर उसे छुड़वा लेता है। डॉन पूछता है कि किधर गया था बे तू? उस पुलिस वाले को क्यों मारा? रॉकी जवाब देता है, 'नाम कमाने गया था। किसी को मारा तो पुलिस ढूंढेगा। पुलिस वाले को ही मारा तो तुम्हारे जैसा डॉन ढूंढेगा।' इस पर डॉन पूछता है कि क्या चाहिए तेरे को? जवाब मिलता है... दुनिया... बस यहां से रॉकी के कदम नए रास्ते पर पड़ जाते हैं।

4. अब किस्सा सूर्यवर्धन और केजीएफ का...

कहानी 1978 में पहुंच जाती है। ईरान और अफगानिस्तान की वजह से अमेरिका और सोवियत संघ में दरार आ गई थी। तमाम सामान के साथ सोने के दामों में भी उछाल आ जाता है, लेकिन सूर्यवर्धन ने अपना कद इतना ऊंचा कर लिया था कि उस तक पहुंचना आसान नहीं रह गया था। केजीएफ का अपना साम्राज्य सुरक्षित करने के लिए उसने पांच पार्टनर बनाए थे, जिन्हें सोने को गलाने से लेकर उसे बेचने तक का जिम्मा दिया गया था। सूर्यवर्धन ने राष्ट्रीय राजनीति में कदम रखकर अपनी ताकत और ज्यादा बढ़ा ली। साथ ही, अपने भाई अधीरा और बेटे गरुड़ा की मदद से केजीएफ को बेहद सुरक्षित कर लिया। ...लेकिन एक दिन सूर्यवर्धन को दिल का दौरा पड़ जाता है। जब वह मौत की कगार पर होता है तो उसके लिए काम करने वाले हर एक शख्स की नीयत खराब होने लगती है और केजीएफ में पहली बार विद्रोह के बादल मंडराने लगते हैं। ऐसे में सूर्यवर्धन केजीएफ की सत्ता भाई अधीरा की जगह बेटे गरुड़ा को सौंप देता है। अधीरा कहता है कि जब तक गरुड़ा जिंदा है, तब तक वह इस गद्दी के बारे में सोचेगा भी नहीं। उधर, सूर्यवर्धन की तबीयत बिगड़ने के बाद सोने की कीमत बढ़ाने की फिराक में बैठा इनायत खलील इसे बंबई में घुसने का सही समय मानता है और बंबई के डॉन शेट्टी के विरोधी दिलावर से हाथ मिला लेता है। पहली बार इनायत खलील का सोना बंबई के पोर्ट पर पहुंचने वाला ही होता है कि वहां रॉकी की एंट्री होती है।

5. ... अब होती है रॉकी की धमाकेदार एंट्री

सीन की शुरुआत में रॉकी एक इमारत में खून से लथपथ जंजीर से बंधा नजर आता है। गुंडों ने उसे चारों तरफ से घेर रखा था, जो रॉकी को जान से मारने की तैयारी करते हैं। अचानक रॉकी अपनी आंखें खोलता है। यह देखते ही हर गुंडा घबरा जाता है। रॉकी बोलता है, 'अपन का खून भी तो लाल ही है। बचपन में ही बंबई में आ गया था। सीधा भट्टी में झोंक दिया गया। इधर गलियों में दो वक्त की रोटी मांगी तो मार मिली। सोने के लिए जगह मांगी तो पीटा गया। लेकिन बंबई को यह नहीं पता था कि भट्टी पर जो गिरा था, वह लोहा था। वह उसे पिघला-पिघलाकर पीट-पीटकर खंजर बना रही थी। और खंजर सिर्फ काटता है।' रॉकी की मारने-पीटने के तरीके को देखकर गुंडे भागने लगते हैं और बंबई में एंट्री करने का इनायत खलील का सपना एक बार फिर टूट जाता है। 

6. रॉकी से शेट्टी को महसूस होता है खतरा

रॉकी के कारनामों की वजह से उसका नाम दूर-दूर तक फैल जाता है। इससे बंबई के डॉन शेट्टी को खतरा महसूस होने लगता है। उसके साथी बताते हैं कि रॉकी की वजह से ही लोग उनसे डरते हैं। रॉकी का नाम पूरी बंबई में ही नहीं, पश्चिमी तट पर भी सुनाई देने लगा है। सभी लोग शेट्टी को सलाम ठोंकते हैं, सिर्फ रॉकी को छोड़कर। रॉकी को तेरी कुर्सी पर बहुत प्यार है। तेरे को लगता है कि कुर्सी तेरी है तो यह तेरी गलतफहमी है। इस पर शेट्टी कहता है कि रेशम तैयार होने तक ही रेशम के कीड़ों की जिंदगी होती है। उसके बाद उनको गरम पानी में डाल देते हैं। इस बंबई में अपुन के एड्रेस पर पिनकोड न हो तो भी पोस्ट आ जाता है। पता है क्यों? अपुन का नाम ही इतना फेमस है। ऐसे में जब शेट्टी के गुंडे रॉकी का मजाक उड़ाते हैं, तभी एंड्रूस की एंट्री होती है। वह रॉकी से कहता है कि बैंगलोर में मेरे लिए एक काम करना है। अगर कर दिया तो पूरी बंबई तेरी। यह सुनते ही शेट्टी के पांव तले जमीन खिसक जाती है। रॉकी कहता है कि पोस्ट सिर्फ एड्रेस की वजह से नहीं आता, लैंडमार्क की वजह से आता है। और इस लैंडमार्क को पिनकोड क्या, स्टाम्प की भी जरूरत नहीं है। रॉकी कहता है कि सिर्फ 10-12 लोगों को मारकर डॉन नहीं बना हूं। मैंने जिन-जिन को मारा, वे सब डॉन ही थे।

7. बैंगलोर में परवान चढ़ी रॉकी की मोहब्बत

एंड्रूस के बुलावे पर रॉकी बैंगलोर पहुंचता है। वहां राजेंद्र देसाई की बेटी रीना रोड ब्लॉक करके पार्टी करती हुई नजर आती है। रॉकी उसे देखते ही फिदा हो जाता है। रॉकी उसे आई लव यू बोल देता है, जिससे रीना भड़क जाती है। वह अपने गुंडे से रॉकी को पीटने के लिए कहती है और रॉकी उन गुंडों को पीट-पीटकर अधमरा कर देता है। इसके बाद रॉकी और रीना की दो और मुलाकात होती हैं, जिसमें रॉकी कहता है, 'ट्रिगर पर अंगुली रखने वाला हर कोई शूटर नहीं होता। लड़की पर हाथ डालने वाला हर कोई मर्द नहीं होता। और अपुन की औकात अपुन को चाहने वालों के अलावा और कोई समझ नहीं सकता।'

8. फिर बनता है गरुड़ा की हत्या का प्लान

सूर्यवर्धन के बीमार होने के बाद से ही उसके साझेदारों की नजर केजीएफ पर थी। ऐसे में वह उसके बेटे गरुड़ा को मारने का प्लान बनाते हैं और इसके लिए रॉकी को चुना जाता है। पहले गरुड़ा को बैंगलोर स्थित डीवाईएसएस पाटिल पार्टी के ऑफिस में मारने की योजना बनाई जाती है, लेकिन रॉकी वहां गरुड़ा की हत्या नहीं कर पाता है। ऐसे में वह केजीएफ जाकर गरुड़ा को मारने का प्लान बनाता है। यह सुनकर रॉकी के दुश्मन खुद हो जाते हैं। वे कहते हैं कि रॉकी जहां जा रहा है, वहां से आज तक कोई वापस नहीं लौटा। ऐसे में कासिम कहता है, 'रॉकी आग है आग और दुश्मन पेट्रोल। दुश्मन जितने ज्यादा बढ़ेंगे, आग उतनी ज्यादा फैलेगी...'

9. केजीएफ में रॉकी की एंट्री

गरुड़ा को मारने के मकसद से रॉकी केजीएफ जाने वाले रास्ते पर निकल पड़ता है। गरुड़ा के तमाम आदमियों को मारकर वह मजदूरों को केजीएफ ले जाने वाले ट्रक में बैठ जाता है और केजीएफ के अंदर पहुंच जाता है। केजीएफ के अंदर की जिंदगी एकदम अलग होती है। वहां जो भी जाता है, जिंदा नहीं लौटता है। वहां जो भी नियमों का उल्लंघन करता, उसे उसकी कीमत अपनी जान देकर चुकानी पड़ती। रॉकी धीरे-धीरे वहां के लोगों की कहानियों का हिस्सा बन और गरुड़ा के महल तक जाने का रास्ता तलाशने लगा। इस बीच रॉकी की हिम्मत देखकर वहां के लोगों को विश्वास होने लगता है कि काल का नाश करने के लिए महाकाल आ गया है... इस बीच रॉकी के कई किस्सों का जिक्र किया जाता है, जिसमें एक शख्स रॉकी से कहता है कि जिंदगी में थोड़ा डर होना चाहिए साहब... रॉकी जवाब देता है, 'करेक्ट... डर होना चाहिए और वह दिल में होना चाहिए। और वह दिल अपुन का नहीं, सामने वाले का होना चाहिए।' 

10. ...रॉकी कर देता है गरुड़ा का कत्ल

अपनी बिगड़ती तबीयत के बीच सूर्यवर्धन केजीएफ के भविष्य को लेकर चिंता जताता है। वह कहता है कि मेरे जाने के बाद बहुत बड़ा तूफान आने वाला है। इनायत खलील बहुत साल से इंतजार कर रहा है। एक बार अंदर घुस गया तो कभी नहीं जाएगा। इसके अलावा रमिका सेन के सत्ता में आने से भी केजीएफ के खात्मे का डर जताता है। उधर, रॉकी केजीएफ के मेंटिनेंस रूम में जाकर नक्शे से गरुड़ा के महल का रास्ता ढूंढता है। इसके बाद रॉकी तमाम गुंडों का कत्ल करके उस मंदिर तक पहुंच जाता है, जहां गरुड़ा काली माता को बलि देने जाता है। वहां रॉकी गरुड़ा का कत्ल कर देता है। इसके बाद एक बार फिर रॉकी का बचपन दिखाया जाता है। यहां एक महिला रॉकी की मां से मारपीट करने की उसकी शिकायत करने आती है तो वह रॉकी का कान पकड़कर जवाब देती है, 'टोली बनाकर मारने गया था? अकेले जा...' गरुड़ा की हत्या के बाद केजीएफ चैप्टर 1 खत्म हो जाता है और इनायत खलील, अधीरा और रमिका सेन जैसे नाम सामने आ जाते हैं। अगर आप इन सभी के बारे में जानना चाहते हैं कि इन सभी का क्या हुआ? गरुड़ा के कत्ल के बाद उसके आदमियों ने रॉकी के साथ क्या किया? रॉकी और रीना की मोहब्बत का क्या हुआ? केजीएफ पर किसने राज किया? रमिका सेन ने रॉकी का डेथ वॉरंट क्यों जारी किया? अगर आपके मन में भी ऐसे तमाम सवाल हैं तो जानने के लिए देखें केजीएफ चैप्टर 2...

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The Owner of this website www.nileshkhandol.blogspot.com is NILESH KUMAR, He loves to write blogging. Blogging is not his profession but he takes it as a passion. He has a long plan for his blogging. He is running endlessly to catch this dream of his. Thank You.

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